अनिवासी खाता

IOB
1.  विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते (बैंक)

विदेशी मुद्रा( अनिवासी ) (एफसीएनआर) खाता कोई भी अनिवासी भारतीय या  भारतीय मूल के व्‍यक्ति द्वारा खोला जा सकता है। ये खाता सावधि जमा के रुप में निम्‍नवत मुद्राओं में खोला जा सकता है।

1.   यू एस डॉलर  ( यूएसडी)
2. ग्रेट ब्रिटन पाउंड ( जीबीपी)
3. यूरो (ईयूआर)
4. जापानीस येन  ( जेपीवाइ)
5. केनडियन डॉलर (सीएडी)
6. ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर  (एयूडी)

जमा की अवधि 1 वर्ष से 5 वर्षों तक होगी। परिपक्‍वता पर ब्‍याज उसी मुद्रा में दिया जायेगा जिस में जमा स्थित है। एक साल तक की अवधि की जमाओं के लिए सामान्‍य ब्‍याज दिया जायेगा और एक साल से ऊपर की अवधिवाली जमाओं के लिए ब्‍याज को अर्ध वार्षिक आधार पर चक्रवृद्ध किया जायेगा। ब्‍याज सहित परिपक्‍वता की संपूर्ण रकम पूर्णत: प्रत्‍यावर्तनीय है।
वर्तमान ब्‍याज दरों  के लिए यहॉं क्लिक करें ।

जमा की न्‍यूनतम रकम इस प्रकार होगी:
यूएसडी 1000 ईयूआर 1000 जीबीपी 1000
सीएडी 1000  एयूडी  1000   जेपीवाई 100000

परिपाकपूर्व बंद करने की अनुमति विद्यमान है । फिर भी ऐसे मामलों में देय ब्‍याज उस दर से एक प्रतिशत कम होगा जो जमा की अवधि के लिए लागू था।

एक साल के पूरा  होने  से पहले ही बंद की जानेवाली जमाओं के लिए कोई ब्‍याज नहीं दिया जायेगा। विशाल जमाओं की परिपाक पूर्व बंदी के लिए स्‍वैप प्रभार लगाये जायेंगे।

इस प्रकार की जमाओं  के प्रति जमा रकम व उपचित ब्‍याज की 75% हद तक  या 20,00,000 तक भारतीय रुपयों  में , दोनों  में से जो भी कम हो, ऋण लिया जा सकता है और इसका उद्देश्‍य निवेश से इतर होना चाहिए।

एफसीएनआर निर्धारित शाखाओं की सूची के लिए यहॉं क्लिक करें।

2.  अनिवासी सामान्‍य(एनआरओ)

अनिवासी व पीआइओ-गण  भारतीय रुपयों में स्‍थानीय  बैंकिंग लेनदेनों हेतु एन आर ओ खाता रख सकते हैं,  जिसमें फेमा के प्रावधानों और उसके तहत अन्‍य नियमों और निबन्‍धनों का उल्‍लंघन नहीं होना चाहिए।( नोट: बंग्‍लादेश / पाकिस्‍तान की राष्‍ट्रीयता वाले एकल व्‍यक्तियों / कंपनियों द्वारा खाता खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन की आवश्‍यकता होती है।)  जब कोई निवासी भारतीय अनिवासी बन जाता है तो भारत में उसके विद्यमान खाते को एनआरओ खाते के रुप में परिवर्तित कर दिया जायेगा।

  • ये खाते बचत, चालू या सावधि जमाओं के रुप में हो सकते हैं। अन्‍य अनिवासियों / पीआइओ या नजदीकी निवासी रिश्‍तेदारके साथ संयुक्‍त खाता खोलने की अनुमति है।
  • विदेश से आनेवाले विप्रेषणों और भारत मेंखाताधारक द्वारा  प्राप्‍त होनवाले वैध देयों को उसके खाते में जमा किया जा सकता है।
  • ब्‍याज से प्राप्‍त आय को आयकर  के बाद ही अदा किया जायेगा।
  • खाते में निम्‍नलिखित नामे किये जाने की अनुमति है:

    1. भारत में निवेशों के लिए किये जाने वाले भुगतानों सहित सभी स्‍थानीय भुगतान ( रुपयों   में  )  बषर्ते कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित निबन्‍धनों का अनुपालन हो।

    2. किराया, लाभांश, पेंशन, ब्‍याज आदि जैसी आय, जो   भारत में स्थित खाता धारक के खाते में जमा होती है, को भारत के बाहर विप्रेषित  किया जा सकता है ।

    3.प्रति वित्‍तीय वर्ष (एप्रैल से मार्च - यू एस डी) एक मिलियन तक विप्रेषण किया जा सकता है बशर्ते कि बैंक की नजरों में इससे संबंधित सभी उद्देश्‍य वास्‍तविक हों।          

3. निवासीय विदेशी मुद्रा खाता (आर एफ सी)  

निवासी विदेशी मुद्रा खाता भारत में उस अनिवासी भारतीय द्वारा रखा जा सकता है जो विदेश में कम से कम एक साल की अवधि के लिए रह कर भारत में स्‍थायी रुप से रहने के लिए आ गया हो । यह खाता खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के  विधिवत अनुमोदन की आवश्‍यकता नहीं हैं।

आरएफसी खाते यूएसडी/यूरो/जीबीपी/जेपीवाई/एयूडी/सीएडी में बचत खाते / सावधि जमा के रुप में बनाये रखा जा सकते हैं।  खाते में जमा निम्‍नवत हो सकती है :-

  1. विदेशी आस्तियों से प्राप्‍त आय या विदेशी आस्तियों की बिक्री से प्राप्‍त आय।
  2. विदेश से प्राप्‍त पेंशन की संपूर्ण रकम ।
  3. खाते में रखे शेष को अपने लिए या अपने आश्रितों के लिए वा‍स्‍तविक उद्देश्‍यों हेतु  विदेश में विप्रेषित किया जा सकता है।
  4. यदि आप दुबारा विदेश जाने का निर्णय लेते हैं तो आप अपनी निधियों को एनआरई/एफसीएनआर खाते में अंतरित कर सकते हैं।
    आरएफसी खाते में अर्जित ब्‍याज पर कर लगाने का प्रावधान है।