आइओबी के बारे में - शुरूआत

IOB
  • शुरुआत कैसे हुई
  • पूर्व-राष्ट्रीयकरण युग (1917-69)
  • राष्ट्रीयकरण के समय (1969)
  • उत्तर-राष्ट्रीयकरण युग (1969-1992)
उत्तर सुधार अवधि - अभूतपूर्व विकास (1992 व बाद में )

शुरुआत कैसे हुई
इण्डियन औवरसीज़ बैंक (आइओबी) की स्थापना 10 फ़रवरी 1937 को श्री एम.सीटीएम.चिदंबरम चेट्टियार ने की जो बैंकिंग, बीमा व उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी थे । बैंक की स्थापना उन्होंने दो उद्देश्यों से की थी - विदेशी विनिमय व्यवसाय तथा विदेशी बैंकिंग में विशिष्टता ।

आइओबी की यह एक अनोखी विशेषता थी कि 10 फ़रवरी 1937 (उद्घाटन दिवस को ही ) को एक साथ 3 शाखाओं में व्यवसाय की शुरुआत की गई - भारत में कारैक्कुडि व चेन्नै में तथा बर्मा मेंरंगून नें जहाँ दूसरी शाखा पेनांग में खुली । स्वतंत्रता के समय आइओबी की भारत में 38 शाखाएँ तथा विदेश में 7 शाखाएँ थीं । उस समय जमा रकम रु.3.23 करोड़ थी ।

पूर्व राष्ट्रीयकरण युग (1947-69)
इस अवधि के दौरान, आइओबी ने अपने देशी गतिविधियों का विस्तार किया तथा अपने अन्तरराष्ट्रीय बैंकिंग परिचालन को बढ़ाया । बैंक ने एक प्रशिक्षण केद्र स्थापित किया जो विकसित होकर चेन्नै में स्टाफ़ कालेज बना । इसके अतिरिक्त देश में 9 स्टाफ़ प्रशिक्षण केंद्र हैं । आइओबी उपभोक्ता ऋण शुरु करनेवाला पहला बैंक था । बैंक ने लोकप्रिय वैयक्तिक ऋण योजना शुरु की 1964 में, अंतर-शाखा लेखा समाधान के क्षेत्रों में कंप्यूटरीकरण की शुरुआत की 1968 में । कृषकों की आवश्यकताओं को विशेष रूप से पूरा करने के लिए आइओबी ने एक संपूर्ण विभाग की स्थापना की । राष्ट्रीयकरण (1969) के समय आइओबी 14 बड़े बैंकों में एक था जो 1969 में राष्ट्रीयकृत हुआ । 1969 में राष्ट्रीयकरण के समय, आइओबी की भारत में 195 शाखाएँ तथा कुल जमा राशि रु.44.90 करोड़ थी ।

उत्तर-राष्ट्रीयकरण युग (1969-1992)
1973 में, आइओबी को अपनी पाँच मलेशियाई शाखाओं को बंद करना पड़ा था, क्योंकि मलेशिया का बैंकिंग कानून सरकारी बैंकों का निषेध करता है । इसके फलस्वरूप युनाइटेड एशियन बैंक बरहद का निर्माण किया गया जिसमें आइओबी की 16.6% हिस्सा है । इसी वर्ष भारत में भारत ओवरसीज़ बैंक लि. बना जिसमें थाइलेंड में स्थित बैंकाक शाखा की 30% इक्विटी भागीदारी थी ।

1977 में, आइओबी ने सियोल में अपनी शाखा खोली तथा 1979 में बैंक ने कोलंबो में विदेशी मुद्रा बैंकिंग यूनिट खोला ।

बैंक ने 3 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों - पुरी ग्राम्य बैंक, पांडियन ग्राम बैंक तथा ढेंकानाल ग्राम्य बैंक को प्रायोजित किया ।

अपना साफ़्टवेयर पैकेज विकसित करने तथा इस क्षेत्र में स्टाफ़ सदस्यों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से कार्यक्रम को कार्यान्वित करने के लिए बैंक के अलग से कंप्यूटर नीति व प्रायोजना विभाग (सीपीपीडी) की स्थापना की ।

उत्तर सुधार अवधि - अभूतपूर्व विकास (1992 व उसके बाद)
फ़रवरी 1997 में आइओबी ने वेबसाइट में प्रवेश किया । 1997-98 के दोरान आइओबी ने स्वायत्त-दर्जा प्राप्त किया। सितंबर 1999 में डेट नौसके वेरिटस (डीएनवी), नीदरलैंड्स से अपने प्रायोजना विभाग हेतु आएएसओ 9001 प्रमाणन प्राप्त करनेवाला आइओबी ने पूरे बैंकिंग उद्योग में पहला बैंक बनने की विशिष्टता प्राप्त की । विकास, कार्यान्वयन तथा बैंक द्वीरा विकसित साफ़्टवेयर के अनुरक्षण, टर्न-की परियोजनाओं की प्राप्ति व निष्पादन के लिए यह प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ ।

बाहरी चेकों की त्वरित उगाही हेतु दिसंबर 1999 में आइओबी ने स्टार सेवा शुरू की । सम्प्रति यह सेवा प्रदान करने के लिए एक नियंत्रक केंद्र कार्यरत है ।

1999 के दौरान, आइओबी ने दिल्ली में एबीबी कार्ड धारक बनकर इंटरनेट व्यवसाय क्षेत्र में प्रवेश किया जिसमें एमटीएनएल वेबसाइट लाग आन द्वारा बैंक ने टेलिफ़ोन बिलों की उगाही शुरू की ।

15 दिसम्बर 2000 से बोर्ड तथा आइबीए पैकेज पर आधारित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना अधिकारियों / कर्मचारीयों के लिए बैंक में शुरू की गई ।

बैंक वित्तीय वर्ष 2000-01 के दौरान जनता से पूँजी उगाहने में सफल रहा । निर्गम 25 सितंबर 2000 के खुला रु.111.20 करोड़ बढ़ाने के लिए तथा अघिक अंशदान के साथ 29 सितंबर 2000 को बंद हुआ । 20 अक्तूबर को आबंटन किया गया । बैंक की पूँजी में सरकार का शेयर कम होकर 75% हुआ ।

आइओबी ने तमिलनाडु में वर्ष 2000 के लिए स्वयं सहायता समूहों को सर्वाधिक संख्या में ऋण प्रदान करने के लिए नाबार्ड का पुरस्कार प्राप्त किया ।

आईडीआरबीटी (बैंकिंग तकनीकी विकास व शोध संस्थान) ने आइओबी को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्रदान किया । यह पुरस्कार 2001 में इनफ़िनेट पर बैंकिंग अनुप्रयोगों के नवोन्मेषी प्रयोग हेतु प्रदान किया गया था । अहमदाबाद तथा बड़ौदा में एसएमएस तकनीक के तहत मोबाइल बैंकिंग शुरू किया गया । 5 महानगरीय केंद्रों में उपशाखाओं में प्रायोगिक बैंकिंग शुरू किया गया । आनलाइन सुरक्षा डायलिंग हेतु भारत के पहले परक्रामित व्यापार पद्धति अपनानेवाले बैंकों में से एक आइओबी था ।

बैंक ने ई-वाणिज्य रणनीति तैयार किया तथा आवश्यक इंटरनेट बैंकिंग विकसित किया । पहली बार बैंक ने स्वयं समग्र शाखा स्वचालन पैकेज विकसित किया ।

अधिकांश साफ़्ट्वेयर बैंक ने खुद विकसित किया ।

आइओबीनेट द्वारा केंद्रीय कार्यालय को सबी क्षेत्रीय कार्यालय से जोड़ा गया । बैंक ने वर्ष 2000-01 हेतु 10% प्रथम लाभांश का भुगतान किया जो 2001-02 के लिए 12% था ।

निष्‍पादन की मुख्‍य बातें : 30.06.2008
2. जमा : 30.06.2007 को कुल जमा 70205 करोड़ रुपये थी जो 30.06.2008 को बढ़कर 85001 करोड़ हो गई , जिससे 21.08% की वृद्धि के साथ 14796 करोड़ की वृद्धि दर्ज़ की गई।

3.अग्रिम : सकल अग्रिम 30.07.2007 को 48610 करोड़ की तुलना में 30.06.2008 को बढ़कर 63419 करोड़ रुपये हो गया , जिससे 30.46 % की वृद्धि के साथ 14809 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज़ की गई।

4. परिचालन लाभ : 2007.08 की प्रथम तिमाही के 409.17 करोड़ रुपये की तुलना में 2008-09 की प्रथम तिमाही में प्रचालन लाभ 241.48 करोड़ रुपये है । इस वर्ष की पहली तिमाही में इस कमी का कारण प्रतिभूतियों का अन्‍तर खण्‍ड प्रवर्ग अंतरण और प्रतिभूतियों की बिक्री से हानि तथा वेतन बकाया के लिए प्रावधान हैं।

5 शुद्ध लाभ : वर्ष 2008-09 की प्रथम तिमाही के लिए कुल लाभ 255.97 करोड़ रुपये है एवं यह वर्ष 2007-08 की प्रथम तिमाही के कुल लाभ 268.49 करोड़ रुपये की तुलना में 12.52 करोड़ रुपये कम है ।

6.कुल आय: वर्ष 2008.09 की प्रथम तिमाही के लिए कुल आय 2168.83 करोड़ रुपये है , जबकि वर्ष 2007-08 की प्रथम तिमाही के लिए यह राशि 1907.79 करोड़ रुपये है। प्रतिशतवार वृद्धि 14.63% है। ब्‍याज में आय की वृद्धि 20.09% दर्ज़ करते हुए 1846.21 करोड़ से बढ़कर 2217.08 करोड़ हो गई है। अन्‍य आय में बिक्री में हानि एवं निवेश पर श्रेणी अंतरण क्षति के कारण कमी आयी है।

7. कुल व्‍यय : वर्ष 2008-09 की प्रथम तिमाही के लिए 29.83% की वृद्धि दर्ज़ करते हुए कुल व्‍यय 1945.64 करोड़ रुपये है, जबकि पिछले वर्ष की संगत तिमाही के लिए कुल व्‍यय 1498.62 करोड़ रुपये है। ब्‍याज व्‍यय 31.10% की वृद्धि दर्ज़ करते हुए 1137.20 करोड़ रुपये से बढ़कर 1490.91 करोड़ रुपये हो गयी है।

8. शुद्ध ब्‍याज आय : वर्ष 2008-09 की प्रथम तिमाही के लिए शुद्ध ब्‍याज आय 726.17 करोड़ रुपये है , जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान यह राशि 709.02 करोड़ रुपये थी । इसमें 2.42% की वृद्धि दर्ज़ की गई ।

9. सी.आर.ए.आर : 30.06.2008 को बसेल I के अंतर्गत सी.आर.ए.आर. 11.41% है एवं टीयर I घटक 7.63 % है । अनुपात 11.25% है । 30.00.2007 को बसेल I के अंतर्गत सी.आर.ए.आर. 13.31% था । इन वर्षों में अनुपात में आयी गिरावट का कारण बढ़ा हुआ व्‍यापार एवं इसके फलस्‍वरूप जोखिम युक्‍त आस्तियों का बढ़ना है । जोखिम युक्‍त आस्तियॉं एक वर्ष के दौरान 55025 करोड़ रुपये से बढ़कर 71597 करोड़ रुपये हो गई । बैंक ने एक वर्ष के दौरान कोई पूँजी नहीं उगाही है।

बैंक आवश्‍यक सी.आर.ए.आर. अनुपात स्‍तर से पर्याप्‍त अधिक है ।

10. प्रतिकर्मचारी व्‍यापार : 30.06.2007 को 4.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 30.06.2008 तक 5.93 करोड़ हो गया।

11. शुद्ध ब्‍याज मार्जिन : 30.06.2007 को समाप्‍त तिमाही के दौरान शुद्ध ब्‍याज मार्जिन 3.71% था एवं 30.06.2008 को समाप्‍त तिमाही के लिए अनुपात 3.12% है ।

11.गिरावट का कारण मार्जिन पर दवाब का होना है अर्थात अग्रिम / निवेश से प्राप्‍त आय पर ब्‍याज में संगत वृद्धि के बिना जमा पर ब्‍याज में वृद्धि का होना है। शुद्ध ब्‍याज मार्जिन मे वृद्धि न्‍यून है।

12.औसत आस्तियों पर प्राप्ति : एक वर्ष के दौरान यह अनुपात 1.27 % से कम होकर 0.99% हो गया ।

13.क्रेडिट जमा अनुपात : एक वर्ष के दौरान यह अनुपात 69.24% से बढ़कर 74.61% हो गया है ।

14. सी. ए. एस. ए. : एक वर्ष के दौरान कुल जमा की तुलना में कम लागत जमा का अंश 32.76% से कम होकर 30.55% हो गया है । कम लागत जमा एवं आइ ओ बी गोल्‍ड एवं सिल्‍वर बचत खाता एवं आइ ओ बी क्‍लासिक एवं सुपर चालू खाता प्रारंभ कर संघन अभियान के द्वारा इस प्रवृत्ति को रोकने की आवश्‍यकता है।

15.एन.पी.ए. प्रबंधन : एक वर्ष के दौरान सकल एन.पी.ए. 1137 करोड़ रुपये से गिरकर 1099 करोड़ रुपये हो गया है । जिससे इसकी प्रतिशतता 2.34 से कम होकर1.73 रह गई है जबकि‍ एक वर्ष के दौरान निवल एन.पी.ए. 0.50% से बढ़कर 0.75 % हो गया है ।

16.कुल पूँजी निशि : आंतरिक अनुवृद्धि के कारण एक वर्ष के दौरान बैंक की कुल पूँजी 7324 करोड़ रुपये से बढ़कर 8170 करोड़ रुपये हो गई है ।

17. प्रति शेयर बुक मूल्‍य : एक वर्ष के दौरान बैंक का प्रति शेयर मूल्‍य 76.12 रुपये से बढ़कर 91.40 रुपये हो गया है।