पर्याप्त पूँजी उपलब्ध होने पर इकाई या सेवा संबंधी कार्यकलाप सुचारू रूप से बढ़ सकते हैं। हमारा बैंक एमएसएमई इकाईयों को आवश्यक कार्यशील पूँजी की सहायता उपलब्ध कराता है।
कार्यशील पूँजी चक्र को ध्यान में रख कर कार्यशील पूँजी की मात्रा का निर्धारण किया जा सकता है। कार्यशील पूँजी चक्र की व्याख्या निम्नलिखित प्रवाह के चार्ट के अनुसार की जा सकती है।
नकदी > कच्चा माल > अर्ध निर्मित माल > तैयार माल> प्राप्य राशि> नकदी
सामान्यत: समझा जाता है कि कार्यशील पूँजी चक्र 3 माह का होगा अर्थात कच्चे माल की खरीद, कच्चे माल का तैयार माल में रूपांतरण, तैयार माल की प्राप्य राशियों में रूपांतरण और प्राप्त राशियों के नकदी में रूपातंरण की अवधि। कार्यकलाप की प्रकृति एवं कई अन्य कारकों के आधार पर यह 3 माह से अधिक या कम हो सकती है। कार्यशील पूँजी ऋण सीमा, नकद उधार, बिल सीमा, गारंटी पत्र इत्यादि के रूप में ली जा सकती है।
प्रतिभूति या अन्य पक्ष की गारंटी
एस एम ई उधारकर्ता के लिए ऋण राशि रु 5 लाख तक के लिए हो तो बैंक द्वारा संपार्श्विक प्रतिभूति या अन्य पक्ष की गारंटी के लिए आग्रह नहीं किया जाएगा। रू 5 लाख से अधिक तथा रु. 25 लाख तक के ऋणों के लिए योग्य मामलों में बैंक द्वारा संपार्श्विक प्रतिभूति या अन्य व्यक्ति की गारंटी का अधित्याग किया जा सकता है और ये ऋण सीमाऍं माइक्रो और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी न्यास के तहत कवर की जाऍंगी।
ब्याज दर
एम एम ई के अग्रिमों के विभिन्न वर्गों के लिए ब्याज दर अलग से उपलब्ध है।